LUCKNOW.हमारा भारत वो देश जिसकी युवा आबादी विश्व के किसी भी और देश से ज्यादा है.जहां हर साल लगभग सवा करोड़ रोजगार योग्य युवा तैयार हो रहे हैं.वहां नौकरियों की हालत दिन ब दिन बदतर होती जा रही है.सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियायें पिछले कुछ सालों में लगातार विवाद का कारण बन रही हैं. हाल ही में प्रकाश मे आये SSC घोटाले को देख कर तो ऐसा लगता है ,कि पढ़ने से बेहतर युवा पैसों का इंतजाम करें और लाखों मे बिक रही नौकरियों को खरीद लें.सालों से जी जान लगा कर मेहनत कर रहे युवावों के लिये ये हतास करने वाले हालात हैं.
विभिन्न विभागों मे लाखों रिक्तियां हैं जिनपर नियुक्तियों की आवश्यकता के बावजूद भी भर्तीयां नही की जा रही हैं.जिन विभागों मे रिक्तियों के लिए परीक्षायें करायी जा रही, उनमें ज्यादातर मामले कहीं न कहीं विवादित हो जा रहे हैं.
रेलवे,बैंकिंग,शिक्षा समेत विभिन्न विभागों में लाखों भर्तियां लंबित हैं.कहीं सालों से परिणाम रुके हैं तो कहीं नियुक्तियां.
यंहा तक की UPSC के द्वारा की जाने वाली अफसरों की भर्तियों में भी काफी कमी आयी है. जहां 2014 में 1291 पदों की विज्ञप्ति थी वही 2017 में 40% घटकर 782 बची है.
जहां पिछले कई सालों से विभिन्न विभागों में लाखों पद रिक्त है, जिन पर भर्तियों की आवश्यकता है. वहीं केंद्र सरकार ने पिछले 5 सालों से अधिक वक्त से रिक्त पड़े पदों को समाप्त करने के संकेत दिए हैं.
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि रोजगार देने के नाम पर सरकार निजी कंपनियों को कर में भारी छूट दे रही है, लेकिन उसके बाद भी निजी कंपनियों में नौकरियों की संख्या दिन ब दिन घटती ही जा रही है.60% से अधिक इंजीनियरिंग स्नातक बेरोजगार है। वही IT कंपनियों में लगातार कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है.
विभिन्न विभागों मे लाखों रिक्तियां हैं जिनपर नियुक्तियों की आवश्यकता के बावजूद भी भर्तीयां नही की जा रही हैं.जिन विभागों मे रिक्तियों के लिए परीक्षायें करायी जा रही, उनमें ज्यादातर मामले कहीं न कहीं विवादित हो जा रहे हैं.
रेलवे,बैंकिंग,शिक्षा समेत विभिन्न विभागों में लाखों भर्तियां लंबित हैं.कहीं सालों से परिणाम रुके हैं तो कहीं नियुक्तियां.
यंहा तक की UPSC के द्वारा की जाने वाली अफसरों की भर्तियों में भी काफी कमी आयी है. जहां 2014 में 1291 पदों की विज्ञप्ति थी वही 2017 में 40% घटकर 782 बची है.
जहां पिछले कई सालों से विभिन्न विभागों में लाखों पद रिक्त है, जिन पर भर्तियों की आवश्यकता है. वहीं केंद्र सरकार ने पिछले 5 सालों से अधिक वक्त से रिक्त पड़े पदों को समाप्त करने के संकेत दिए हैं.
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि रोजगार देने के नाम पर सरकार निजी कंपनियों को कर में भारी छूट दे रही है, लेकिन उसके बाद भी निजी कंपनियों में नौकरियों की संख्या दिन ब दिन घटती ही जा रही है.60% से अधिक इंजीनियरिंग स्नातक बेरोजगार है। वही IT कंपनियों में लगातार कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है.

sahi kaha bhai
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