LUCKNOW.हमारे देश में पिछले कुछ दिनों से धार्मिक कट्टरता का नंगा नाच जोरों से चल रहा है। चाहे वह पश्चिम बंगाल हो या फिर बिहार। लोगों की जाने जा रही हैं, और हमारे नेता इन मौतों पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। सियासी बयानबाजियों का भी माहौल गर्म है। ऐसे में हमें अपनी राजनीतिक और धार्मिक समझ बढ़ाने की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा हिंदू मुसलमान एक दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। बल्कि राजनीतिक पार्टियां अपने लाभ के लिए धर्म के नाम पर हमें भड़का रही हैं। असल में यह मौतें धार्मिक कट्टरता नहीं बल्कि गंदी राजनीति का नतीजा हैं।
धार्मिक कट्टरता के विषय में गणेश शंकर विद्यार्थी का एक कथन उल्लेखनीय है। वह कहते थे कि
"मैं हिंदू मुसलमानों के झगड़े का मूल कारण इलेक्शन आदि को समझता हूं।"
साथ ही उनके द्वारा हिंदू मुस्लिम कट्टरता को लेकर की गई कुछ आलोचनाएं भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिंदू कट्टरता के लिए के लिए कहा था कि-
"कुछ लोग हिंदू राष्ट्र-हिंदू राष्ट्र चिल्लाते हैं। हमें क्षमा किया जाए यदि हम कहें नहीं। हम इस बात पर ज़ोर दें कि वे एक बड़ी भारी भूल कर रहे हैं और उन्होंने अभी तक राष्ट्र शब्द के अर्थ ही नहीं समझा। हम भविष्य वक्ता नहीं पर अवस्था हमसे कहती है कि अब संसार में हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता।"
और कुछ इसी तरह उन्होंने मुस्लिम कट्टरता के लिए भी कहा था-
"वे लोग भी इसी प्रकार की भूल कर रहे हैं जो टर्की या काबुल, मक्का या जेद्दा का स्वप्न देखते हैं, क्योंकि वे उनकी जन्मभूमि नहीं और इसमें कुछ भी कटुता न समझी जानी चाहिए यदि हम ये कहें कि उनकी क़ब्रें इसी देश में बनेंगी और उनके मर्सिये इसी देश में गाए जाएंगे।."
इनके द्वारा कही गई इन बातों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। चाहे वह कट्टरता को बढ़ावा दे रही राजनीति हो या हमारी धार्मिक कट्टरता को बढ़ाती हमारी खुद की सोच। यह कथन हमारी सोच को आईना दिखाते हैं। आज जिस तरह से देश में धार्मिक कट्टरता दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, यह हमारे भविष्य के लिए अच्छी खबर नहीं है। हमें दूसरा पाकिस्तान बनने से बचना होगा।हमें आपस में नहीं एक दूसरे के लिये लड़ने की जरूरत है।

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