लखनऊ की झुग्गियों में स्वास्थ्य सुविधाएं
कूड़ा किसी के लिए बीमारी तो किसी के लिए जीवन यापन का साधन.किसी के लिए बदबू तो किसी के लिए उसमें से आती खाने की खुशबू. कूड़ा जो हम अपने घर से समेट कर बाहर फेंकते हैं, झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले कूड़ा बीनने वाले लोग उसमें अपने उपयोग के सामान तलाश कर उन्हें बेचकर अपने 2 जून की रोटी का इंतजाम करते हैं.
हमने झुग्गियों की हालात के बारे में गहराई से जानने के लिए वहां जाने का फैसला किया. हमारे मन में बहुत सारे सवाल थे कि आखिर जो चीजें हमारी बीमारी की वजह बनती हैं, कैसे उसमें यह अपनी जिंदगी तलाश कर जी रहे हैं? क्या यह लोग बीमार नहीं होते ?यह बीमार होते हैं तो यह स्वास्थ्य सेवाएं कहां से लेते हैं? क्या इन तक स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही होती हैं?
हमने देखा कि कैसे इस कूड़े में कुछ जिंदगियां तबाह हो रही हैं, तो कुछ इस कूड़े के सहारे अपने आगे के जीवन के सफर को आसान बनाने की जुगत में लगे हुए हैं. न जाने कितने बचपन इन झोपड़ियों में बर्बाद हो रहे हैं. तो न जाने कितने युवा यहां की कमाई से अपनी जिंदगी को एक नया रूप देने की राह पर चल पड़े हैं. इन सबके बीच यहां की बदतर हालात का जो सबसे बड़ा शिकार है वह मासूम बचपन है.




