Followers

Monday, 23 April 2018

लखनऊ की झुग्गियों में स्वास्थ्य सुविधाएं।


लखनऊ की झुग्गियों में स्वास्थ्य सुविधाएं

 कूड़ा  किसी के लिए बीमारी तो किसी के लिए जीवन यापन का साधन.किसी के लिए बदबू तो किसी के लिए उसमें से आती खाने की खुशबू.  कूड़ा  जो हम अपने घर से समेट कर बाहर फेंकते हैं, झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले  कूड़ा बीनने वाले लोग उसमें अपने उपयोग के सामान तलाश कर उन्हें बेचकर अपने 2 जून की रोटी का इंतजाम करते हैं.
हमने झुग्गियों की हालात के बारे में गहराई से जानने के लिए वहां जाने का फैसला किया. हमारे मन में बहुत सारे सवाल थे कि आखिर जो चीजें हमारी बीमारी की वजह बनती हैं, कैसे उसमें यह अपनी जिंदगी तलाश कर जी रहे हैं? क्या यह लोग बीमार नहीं होते ?यह बीमार होते हैं तो यह स्वास्थ्य सेवाएं कहां से लेते हैं?  क्या इन तक स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही होती हैं?

 

हमने देखा कि कैसे इस कूड़े में कुछ जिंदगियां तबाह हो रही हैं, तो कुछ इस कूड़े के सहारे अपने आगे के जीवन के सफर को आसान बनाने की जुगत में लगे हुए हैं. न जाने कितने बचपन इन झोपड़ियों में बर्बाद हो रहे हैं. तो न जाने कितने युवा यहां की कमाई से अपनी जिंदगी को एक नया रूप देने की राह पर चल पड़े हैं. इन सबके बीच यहां की बदतर हालात का जो सबसे बड़ा शिकार है वह मासूम बचपन है.

Sunday, 1 April 2018

बिछड़ता बचपन-मिलती जवानी,इससे गुजरे हर लड़के की कहानी।


आइए समझते हैं एक लड़के की  बचपन से  जवानी की ओर बढ़ती  उम्र के साथ उसके अंदर आए बदलाव को।  बदलते वक्त के साथ लिखी उसकी कुछ पंक्तियों से।
जब उसका सिर्फ एक जान से प्यारा दोस्त होता है-
                   
                      मेरी हंसी है तू मेरी खुशी है तू।
                      यार ही नहीं मेरी जिंदगी है तू।

फिर उसे इश्क का कीड़ा काटता है-

  तपती दोपहरी में पेड़ की छाया सा सुकून मिलता है तुम्हें        सोच कर।
  शायद खुदा ने ही मिलाया है हमें इस दुनिया की भीड़ में          खोज कर।

फिर वो कीड़ा उसकी जिंदगी में जहर घोल कर चला जाता है-
                   

       हम यूंही नहीं भूलेंगे ये जो गम उसके जाने का है।
      आखिर चुकाना जो कर्ज कुछ पल मुस्कुराने का है।

और फिर वह जिंदगी की जद्दोजहद में उलझ जाता है-


         जिंदगी उलझी हुई डोर के जैसी होती जा रही है।
           जितना  सुलझाओ उतना उलझती जा रही है।

हिंदू-मुसलमान धार्मिक कट्टरता नहीं,राजनीतिक कट्टरता के शिकार।


LUCKNOW.हमारे देश में पिछले कुछ दिनों से धार्मिक कट्टरता का नंगा नाच जोरों से चल रहा है। चाहे वह पश्चिम बंगाल हो या फिर बिहार। लोगों की जाने जा रही हैं, और हमारे नेता इन मौतों पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। सियासी बयानबाजियों का भी माहौल गर्म है। ऐसे में हमें अपनी राजनीतिक और धार्मिक समझ बढ़ाने की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा हिंदू मुसलमान एक दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। बल्कि राजनीतिक पार्टियां अपने लाभ के लिए धर्म के नाम पर हमें भड़का रही हैं। असल में यह  मौतें धार्मिक कट्टरता नहीं बल्कि गंदी राजनीति का नतीजा हैं।
धार्मिक कट्टरता के विषय में गणेश शंकर विद्यार्थी का एक कथन उल्लेखनीय है। वह  कहते थे  कि

          "मैं हिंदू मुसलमानों के झगड़े का मूल कारण इलेक्शन आदि को समझता हूं।"

साथ ही उनके द्वारा हिंदू मुस्लिम कट्टरता को लेकर की गई कुछ आलोचनाएं भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिंदू कट्टरता के लिए के लिए कहा था कि-

       "कुछ लोग हिंदू राष्ट्र-हिंदू राष्ट्र चिल्लाते हैं। हमें क्षमा किया जाए यदि हम कहें नहीं। हम इस बात पर ज़ोर दें कि वे एक बड़ी भारी भूल कर रहे हैं और उन्होंने अभी तक राष्ट्र शब्द के अर्थ ही नहीं समझा। हम भविष्य वक्ता नहीं पर अवस्था हमसे कहती है कि अब संसार में हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता।"

और कुछ इसी तरह उन्होंने मुस्लिम कट्टरता के लिए भी कहा था-

"वे लोग भी इसी प्रकार की भूल कर रहे हैं जो टर्की या काबुल, मक्का या जेद्दा का स्वप्न देखते हैं, क्योंकि वे उनकी जन्मभूमि नहीं और इसमें कुछ भी कटुता न समझी जानी चाहिए यदि हम ये कहें कि उनकी क़ब्रें इसी देश में बनेंगी और उनके मर्सिये इसी देश में गाए जाएंगे।."

इनके द्वारा कही गई इन बातों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। चाहे वह कट्टरता को बढ़ावा दे रही राजनीति हो या हमारी धार्मिक कट्टरता को बढ़ाती हमारी खुद की सोच। यह कथन हमारी सोच को आईना दिखाते हैं। आज जिस तरह से देश में धार्मिक कट्टरता दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, यह हमारे भविष्य के लिए अच्छी खबर नहीं है। हमें दूसरा पाकिस्तान बनने से बचना होगा।हमें  आपस में नहीं एक दूसरे के लिये लड़ने की जरूरत है।

सनी देवोल को कोर्ट के इस आदेश के बाद बदलना पड़ता अपना तारीख पे तारीख वाला डायलाग ।

दामिनी पिक्चर वाले सनी देओल  याद  हैं?अगर 14 जुलाई के बाद उनका  कोई केस राजस्थान हाईकोर्ट में फँसता उनको बार बार तारीख़ पर तारीख़ मिलती,और उ...

Populer post