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Saturday, 31 March 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी किताब "स्कैम वारियर्स" जल्द ही होगी लॉन्च



LUCKNOW. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी गई दूसरी किताब "स्कैम वारियर्स" के जल्द ही लॉन्च होने के संकेत मिले हैं।जहां उन्होंने अपनी पहली किताब "एग्जाम वारियर्स" बच्चों से परीक्षा के तनाव को दूर करने के लिए लिखी थी। वहीं लोगों ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपनी दूसरी पुस्तक परीक्षाओं के बाद  उनमें सामने  आने वाले स्कैम पर लिखेंगे। जिससे कि बच्चे तनाव से बच सकें और वह आगे की परीक्षाओं में  स्कैम  के लिए तैयार रहें। यह पुस्तक उन सभी छात्रों के लिए मददगार साबित होगी  जो इन घोटालों से बहुत ज्यादा परेशान हैं।सूत्रों से खबर मिली है इस किताब के  आवरण पृष्ठ पर स्कैम के विरुद्ध में धरना कर रहे लड़कों की लाठियों से  पिटने  की  तस्वीर होगी।वहीं आवरण पर ही मोदी जी की भी तस्वीर होगी जिसमें उनके हाथों में लाठी होगी।
साथ ही सूत्रों ने बताया कि मोदी जी अपने अगले मन की बात कार्यक्रम में  घोटालों से परेशान छात्रों के लिए चिंता भी व्यक्त करेंगे।उनका मानना है कि घोटाले परीक्षार्थियों की सहनशक्ति जांचने का एक अच्छा तरीका है इसलिए परीक्षार्थी परेशान ना हों। उन्होंने चिंताओं को दूर करने के लिए हर साल  "स्कैम उत्सव" मनाने की अपील भी करने की सोची है।
जिसमें घोटालों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाए। जिससे घोटालों के लिए बैठा छात्रों के मन में भय दूर हो जाए। स्कैम पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हो। छात्रों को यह भी समझाया जाए कि उनकी पढ़ाई हर हाल में बेकार ही जाएगी। इसलिए तनाव ना लें।
 उनका लक्ष्य पिछली किताब की तरह ही इस किताब में भी छात्रों को स्कैम के प्रति  "वारियर" यानी योद्धा बनने का संदेश देना होगा।

Friday, 30 March 2018

विश्व के सबसे युवा देश में रोजगार की बदतर हालत

LUCKNOW.हमारा भारत  वो देश जिसकी युवा आबादी विश्व के किसी भी और देश से ज्यादा है.जहां हर साल लगभग सवा करोड़ रोजगार योग्य युवा तैयार हो रहे हैं.वहां नौकरियों की हालत दिन ब दिन बदतर होती जा रही है.सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियायें पिछले कुछ सालों में लगातार विवाद का कारण बन रही हैं. हाल ही में प्रकाश मे आये SSC घोटाले को देख कर तो ऐसा लगता है ,कि पढ़ने से बेहतर युवा पैसों का इंतजाम करें और लाखों मे बिक रही नौकरियों को खरीद लें.सालों से जी जान लगा कर मेहनत कर रहे युवावों के लिये ये हतास करने वाले हालात हैं.
विभिन्न विभागों मे लाखों रिक्तियां हैं जिनपर नियुक्तियों की आवश्यकता के बावजूद भी भर्तीयां नही की जा रही हैं.जिन विभागों मे रिक्तियों के लिए परीक्षायें करायी जा रही, उनमें ज्यादातर मामले कहीं न कहीं विवादित हो जा रहे हैं.
रेलवे,बैंकिंग,शिक्षा समेत विभिन्न विभागों में लाखों भर्तियां लंबित हैं.कहीं सालों से परिणाम रुके हैं तो कहीं नियुक्तियां.
यंहा तक की UPSC के द्वारा की जाने वाली अफसरों की भर्तियों में भी काफी कमी आयी है. जहां 2014 में 1291 पदों की विज्ञप्ति थी वही 2017 में 40% घटकर 782 बची है.
 जहां पिछले कई सालों से विभिन्न विभागों में लाखों पद रिक्त है, जिन पर भर्तियों की आवश्यकता है. वहीं केंद्र सरकार ने  पिछले 5 सालों से अधिक वक्त से रिक्त पड़े पदों को समाप्त करने के संकेत दिए हैं.
  ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि रोजगार देने के नाम पर सरकार निजी कंपनियों को कर में भारी छूट दे रही है, लेकिन उसके बाद भी निजी कंपनियों में नौकरियों की संख्या दिन ब दिन घटती ही जा रही है.60% से  अधिक इंजीनियरिंग स्नातक बेरोजगार है। वही IT कंपनियों में लगातार कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है.

Thursday, 22 March 2018

क्या फर्जी एनकाउंटर में पुलिस अपराधियों को मारकर खुद कर रही अपराध?



LUCKNOW. वह सुबह भी उनके लिए सामान्य दिनों की सुबह जैसी थी,जब तक कि उनको अपने बेटे छन्नू के जिला अस्पताल में भर्ती होने की खबर नहीं मिली.2 पुलिसवालों ने जैसे ही खबर दी उनकी सुबह की रंगत उतर गई. छन्नू पुलिस से मुठभेड़ में घायल हो गया था.वह अस्पताल पहुंचे तो पता चला उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है.

यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है.उत्तर प्रदेश पुलिस की पिछले 1 साल में की गई लगभग साढे ग्यारह सौ मुठभेड़ में मारे गए 44 अपराधियों में से  ही एक की कहानी है.पुलिस वालों ने उसको अमरूद की बाग से उठा लिया था.फिर जो वापस घर पहुंची वह छन्नू की लाश थी.अपराधी रहा हो या नहीं पर क्या उसको मार देना अपराध खत्म करने के लिए उचित था, कहीं ऐसा तो नहीं कि उत्तर प्रदेश पुलिस सरकार की छूट का दुरुपयोग कर रही है? क्या व्यक्तिगत मसलों को मुठभेड़ की आड़ में सुलझाया जा रहा है?
 महात्मा बुद्ध ने कहा था"पाप से घृणा करो पापी से नहीं" पर यहां तो पाप को खत्म करने के नाम पर कहीं पापियों को ही मार दिया जा रहा है, तो कहीं बेगुनाहों को भी शिकार बनाया जा रहा है. जिसका प्रभाव समाज पर विपरीत भी पड़ सकता है.
इन सारे सवालों और घटनाओं के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने फर्जी मुठभेड़ पर जांच बैठा दी है. विधानसभा में भी विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है.
पर सवाल जस का तस है.क्या इस तरह से पूर्व नियोजित तरीके से  फर्जी एनकाउंटर में पुलिस अपराधियों को मारकर खुद कानून की नजर में अपराध तो नहीं कर रही है?

सनी देवोल को कोर्ट के इस आदेश के बाद बदलना पड़ता अपना तारीख पे तारीख वाला डायलाग ।

दामिनी पिक्चर वाले सनी देओल  याद  हैं?अगर 14 जुलाई के बाद उनका  कोई केस राजस्थान हाईकोर्ट में फँसता उनको बार बार तारीख़ पर तारीख़ मिलती,और उ...

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